आगरा। कोरोना के खिलाफ जंग में यह मुश्किल समय चल रहा है। कठिन समय में डाक्टर, पुलिस और सफाई कर्मचारी अपनी जान की परवाह किए बिना लोगों की सेवा कर रहे हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त न होने की जरूरत है। मदद करने वालों को निशाना नहीं बनाएं, बल्कि उन्हें थैंक यू बोले। लॉक डाउन के बीच में हम अपनी पहचान यानि सभ्यता-संस्कृति को बिल्कुल नहीं भूले। कठिन समय में भी धैर्य और संयम के साथ परीक्षा में पास होने की जरूरत है।
इस बारे में सरकार और स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा बराबर हिदायतें भी दी जा रही हैं कि इस मुश्किल वक्त में मदद को हाथ बढ़ाने वालों को निशाना न बनाकर उनके प्रति धन्यवाद ज्ञापित करें । ऐसे लोगों को निशाना बनाने से हमारी लड़ाई कमजोर पड़ जाएगी । किसी तरह की अफवाह न फैलाएं बल्कि खुद सुरक्षित रहें और आस-पास सभी को सुरक्षित रखें । कोरोना पर विजय पाने वालों के प्रति किसी भी तरह का भेदभाव व बहिष्कार न करें क्योंकि इससे कोई भी संक्रमित हो सकता है । हालाँकि अधिकतर लोग इससे ठीक हो जाते हैं, ऐसे में रोगी और परिवार को हमारे सहयोग की जरूरत है न कि भेदभाव की।
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भेदभाव को रोकने के लिए क्या करें :
- आवश्यक सेवाएं प्रदान करने वालों की सराहना और सहयोग करें
- सरकारी स्रोतों, स्वास्थ्य मंत्रालय या डब्ल्यूएचओ की प्रामाणिक जानकारी ही साझा करें
- किसी भी जानकारी को साझा करने से पहले विश्वसनीय स्रोतों से क्रास चेक कर लें
- कोरोना वायरस को मात देने वालों की सकारात्मक कहानियां साझा करें
भेदभाव को रोकने के लिए ऐसा न करें :
- संक्रमित व क्वेरेंटाइन में रहने वालों के नाम/पहचान को सोशल मीडिया पर साझा न करें
- दहशत फैलाने से बचें, किसी समुदाय या क्षेत्र को कोविड के प्रसार का कारण न बताएं
- हेल्थ केयर, सफाईकर्मी या पुलिस को निशाना न बनाएं, वह आपकी मदद के लिए ही हैं
- मरीज को कोविड पीड़ित कहने के बजाय कोरोना के विजेता के रूप में संबोधित करें
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