माता प्रसाद पाण्डेय, संवाददाता भारत भारी
नगर पंचायत भारत भारी मोतीगंज चौराहे पर चल रहे नव दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञानयज्ञ में बृहस्पतिवार को श्रीमद् भागवत कथा के छठवें दिन कथावाचक पंडित रामबहाल शास्त्री ने भक्तों को भगवान श्री कृष्ण के जन्म का प्रसंग प्रस्तुत किया। कथा के बीच में प्रस्तुत भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे। श्रीमद् भागवत कथा की अमृत वर्षा करते हुए राम बहाल शास्त्री ने कहा कि जब भगवान का कारागार में जन्म हुआ तो रात के अंधेरे काल में सब पहरेदार सम्मोहन में आ गए वासुदेव की बीड़ी खुल गई तब देवकी के परामर्श अनुसार बालक को टोकरी में रखकर यमुना पार कर गोकुल में नंद ग्राम में कन्या से बदल आए उस समय यमुना पूरे उफान पर थी लेकिन भगवान श्रीकृष्ण के पैर का स्पर्श होते ही वह शांत हो गई। उधर कंस को सूचना दी कि देवकी का आठवां बालक हुआ है तो उसने देवकी से कन्या को छीनकर पत्थर पर पटकना चाहा लेकिन वह आकाश मार्ग से स्वर्गारोहण कर गई तब आकाशवाणी हुई कि अरे मूर्ख कंस तुझे मारने वाला ब्रज मंडल में अवतरित हो गया है। शास्त्री जी ने बाल लीला का वर्णन करते हुए कहा कि कृष्ण के पैदा होने के बाद कंस उनको मारने के लिए अपनी राज्य की सर्वाधिक बलवान राक्षस पूतना को भेजता है। पूतना वेष बदलकर भगवान श्री कृष्ण को अपने स्तन से जहरीला दूध पिलाने का प्रयास करती है। लेकिन भगवान श्री कृष्ण उसको मौत के घाट उतार देते हैं। उसके बाद कार्तिक माह में ब्रजवासी भगवान इन्द्र को प्रसन्न करने के लिए पूजन का कार्यक्रम करने की तैयारी करते हैं। भगवान कृष्ण द्वारा उनको भगवान इन्द्र की पूजन करने से मना करते हुए गोवर्धन महाराज की पूजन करने की बात कहते हैं। इन्द्र भगवान उन बातों को सुनकर क्रोधित हो जाते हैं। वह अपने क्रोध से भारी वर्षा करते हैं। जिसको देखकर समस्त ब्रजवासी परेशान हो जाते हैं। भारी वर्षा को देख भगवान श्री कृष्ण गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठा अंगुली पर उठाकर पूरे नगरवासियों को पर्वत के नीचे बुला लेते हैं। जिससे हार कर इन्द्र एक सप्ताह के बाद बारिश को बंद कर देते हैं। भगवान श्री कृष्ण और गोवर्धन महाराज की झांकी देख सारे श्रद्धालुओं के जयकारे से पूरा पंडाल गुंजायमान रहा।मौके पर भगवान को छप्पन प्रकार का भोग लगाया गया। इसके बाद मटकी फोड़ माखन चुराने वाली झांकी ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। मुख्य यजमान राधेश्याम अग्रहरि, सुशीला अग्रहरि, सावित्री अग्रहरि, अमित अग्रहरि, अजय अग्रहरि, विजय अग्रहरि, राजन अग्रहरि, हरिशंकर अग्रहरि, धर्मराज रमेश कसौधन उमाशंकर अग्रहरि बुधिसागर पाण्डेय आदि काफी श्रद्धालुओं ने कथा का रसपान किया।
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